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२९ मङ्सिर, जनकपुरधाम। निधि के कहनाय छनि जे लोक के त्रिशंकुपर लटकल संसद के बेसि चिंता नहि करबाक चाही किएक त नेपाल के राजनीतिक दल मे वैचारिक मतभेद रहितो सहयोग के संस्कृति विकसित भेल अछि। अंश : ४ मङ्सिर के संसदीय आ प्रांतीय चुनाव मे लटकल संसद आ लटकल प्रदेशसभा पैदा भेल। की फेर स राजनीतिक अस्थिरता क चिंता करबाक चाही?

हम सब २ तरहक चुनावी व्यवस्था अपनाओने छि अर्थात फर्स्टपास्ट-द-पोस्ट सिस्टम आ समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली, जे कहैत छथि जे त्रिशंकु पर पड़ल संसद आ विधानसभा राजनीतिक अस्थिरता नहि द सकैत अछि, हुनका तर्क मे किछु तर्क अछि। लेकिन हमरा सब के राजनीतिक अस्थिरता के बेसी चिंता नै करबाक चाही कियाक त हाल के वर्ष में हम सब राजनीतिक दल के वैचारिक मतभेद, दल के बीच टकराव आ राजनीतिक मतभेद के बावजूद सहयोग के किछु उदाहरण पेश केने छी। एहि क्षेत्रक अन्य देशक तुलना मे ई बहुत नीक बात अछि।

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