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१६ मङ्सिर, जनकपुरधाम। नेपालमे मूल्य वर्धित कर अधिनियम २०५२ मे बनल छल । मूल्य वर्धित कर २०५४ स शुरू भेल। ओहि समय मे ई कर बिक्री कर, होटल कर, अनुबंध कर, मनोरंजन कर जेहन बहुत रास शीर्षक मे कर कए एकीकृत कए लगाउल गेल छल । कर वसूली के लागत कम करै आरू करदाता लेल सहज बनाबै के उद्देश्य स॑ मूल्य वर्धित कर शुरू करल गेल छै।

उपभोक्ता द्वारा उपभोग कें लेल देल गेल ‘कर’ मूल्य वर्धित कर छै. अपना सब के एखनो ई भ्रम अछि जे Value added tax के भुगतान व्यापारी सब करैत छथि। जे उपभोग करत ओ मूल्य वर्धित कर देत।
वस्तु आ सेवाक कें खरीद करय कें समय खरीदार (उपभोक्ता) कें द्वारा देल जाय वाला कर मूल्य वर्धित कर छै। अतः जखन ई शुरू भेल छल तखनो मूल्य वर्धित कर एहि मान्यता सं लागू कयल गेल जे ‘बहुत तरहक करक बदला एकटा कर लगाबी, ई उपभोग पर आधारित अछि, जे बेसी उपभोग करैत अछि, ओ बेसी पाइ दैत अछि’।

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