११ मङ्सिर, जनकपुरधाम। मिथिलाके महान पावन सप्ताहव्यापी विवाहपञ्चमी महोत्सवके आई पांचम दिन मट्कोरके बिधि सम्पन्न भेल अछि। आई के दिन जनकपुरके धार्मिक तथा एतिहासिक गंगासागरमे पहुचक मैथिली परम्परा अनुसार जानकीके मटकोर कयल गेल।
मिथिलाको विधिविधान अनुसार अनुसार पीयर साड़ी आ चोलो सन नव वस्त्र पहिरि सीता केँ गंगा सागर्मे स्नान करबाक प्रथा अछि | त्रेतायुगमे सीता आ रामके विवाहक लागि यज्ञवेदी निर्माण करेक लेल गंगा सागर सं पवित्र माटि उत्खनन क विवाह पंचमी महोत्सवमे माटि ल’ जेबाक मैथिली परम्परा रहल अछि | गंगा सरगरसं उत्खनन् भेल माटिके जानकी मन्दिरमे मडवा बनाबे क चलन रहल अछि।
मिथिला परम्परा के अनुसार गंगेसागर में जानकीके मटकोरक संग-संग बजागजा के साथ भव्य रूप स प्रस्तुत करबाक प्रथा अछि, ई मैथिल परंपरा अछि जे भक्त महिला सब मटकोर में भाग लै छथिन आ विवाह स संबंधित प्रासंगिक गीत के लोक भाषा में गबैत छथिन |
तहिना मटकोरके काज पूरा भेलाक बाद मिथिलांचल में चना, बदाम, पूरी आ खीर वितरण के परंपरा रहल अनुसार मटकोरक लेल आयल श्रद्धालु के प्रसाद बांटल जाइत अछि | काईल सोमदिन जनकपुरमे भगवान राम आ जनाकिके डोला फेर क स्वयम्बर रंग भुमिमे करैत तहिना विवाहक काज जानकी मन्दिरमे होयत।
मंसिर ७ गतेसं विधिवत रुप सं सुरु भेल सीताराम विवाहपञ्चमीके पहिल दिन नगर दर्शन, दोसर दिन फुलबारी लिला, तेसर दिन धनुष यज्ञ, चारिम दिन तिल्कोस्त्सब, पांचम दिन मट्कोर, छठम दिन विवाह तहिना सातम दिन राम केलावा मनाओल जाइत अछि ।